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तीन तलाक़ और हमारा समाज भाग-2.

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रफ़्तार न्यूज़ • 13 जून • 23:11 pm  • अनुराग श्रीवास्तव  तीन तलाक़ ऐसा मसला है जो खत्म होने का नाम ही नही ले रहा है. मैंने इस पर पहले भी लिखा था आज इस पर फिर से लिखने जा रहा हूं क्योंकि एक बार फिर कुछ ऐसा हुआ है जो मुझे लिखने पर मज़बूर कर रहा है, लेकिन इस बार बात समस्या कि नही समस्या कि एक छोटी सी समाधान कि है. जहां एक ओर उत्तरप्रदेश मे तीन तलाक़ का मामला गरमाया हुआ है वही उत्तरप्रदेश के सम्भल मे कुछ ऐसा हुआ जिसे देख यक़ीन हुआ कि मसला पूरी तरह से बिगड़ा हुआ नही है, यक़ीन हुआ कि समाज मे थोड़े बहुत ही सही बदलाव हो रहे है. समाज मे मुस्लिम मर्दों को लेकर जो छवि बनी है वो छवि यहां आ कर टूट रही है, वो कहावत सही सिद्ध हो रही है जिसमें कहा गया है कि हर मर्द एक जैसे नही होते. तीन तलाक को लेकर देश में छिड़ी जोरदार बहस के बीच मुसलमानों की ‘तुर्क’ बिरादरी ने बड़ी पहल करते हुए अपने समाज में ‘एक साथ तीन तलाक’ देने पर पाबंदी लगाई है और कहा है कि अब तीन तलाक के मामले में सारी गलती शौहर की मानी जाएगी. साथ ही पंचायत के पास उसे सजा देने का अधिकार होगा. सम्भल के करीब 55 गांवों में फैली करीब 50 हज...

फेसबुक पर ऐसी तस्वीरें शेयर करने के पहले सोच लेना.

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उम्र में मुझसे बीस-एक साल बड़े, मेरे एक बड़े अच्छे दोस्त कहा करते हैं कि भारत देश एक बिना ‘ह्यूमर’ का देश है. यहां लोग किसी भी बात पर हंस सकते हैं. और हंसने की बात पर ओफेंड हो सकते हैं. ये बात जितनी आसानी से कही गई, असल में इतनी आसान है नहीं. इसे समझने के लिए हमें अपने देश में होने वाली हर तरह की पॉपुलर कॉमेडी को देखना होगा. हमें देखना होगा हम किस तरह की बातों पर हंसते हैं. किस तरह की बातों पर बुरा मानते हैं. आजकल फेसबुक पर एक मजाक चला है. किसी भी एक लड़की या लड़के की फोटो अपलोड करते हैं. लिखते हैं कि ये अपने लिए पति/पत्नी ढूंढ रहा है जिसका नाम फलाना है. इसलिए आप फलाने व्यक्ति को टैग करिए. ये हंसने के लिए होता है. कि लोग अपने दोस्त को टैग करें और इस बात पर हंसें कि अब तो दोस्त को एक ‘बदसूरत’ पति या पत्नी मिलने वाली है. बदसूरत की परिभाषा इस बात से होती है कि अगला काला, मोटा, खराब दांत वाला, गंजा, या ऐसे किसी शारीरिक फीचर वाला हो जिसे हम आमतौर पर ‘सुंदर’ की परिभाषा में नहीं रखते हैं. ये इसके कुछ उदाहरण है. 1. (प्रतिभा मिश्रा के फेसबुक से साभार) 2. 3. कुल मिलाकर अगर कोई ‘सुंदर’ लड़की मिल गई तो...

शहर कि विकास कि रफ़्तार अब इनके हाथ मे है सरकार.

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[caption width="1770" align="alignleft"] Raftaar News || 9 June || 23:17[/caption] आज मुजफ्फरपुर के लिये खास दिन था, आज शहर को अपना नया मेयर और उप मेयर मिलने वाला था. आज सुबह से ही पूरे शहर मे माहौल गरम था हम भी पहुँच गये ख़बर जुटाने अभी वकत था सो हम पास के चाय कि दुकान पर पहुँच गये , दबा कर भीड़ लगी थी, बिहार मे दो चीज दबा कर चली एक शराब व दूजा चाय. वैसे तो बिहार मे अब "अथ श्री दारू कथा" समाप्त हो चुकी है फिर भी कही ना कही इसकी महीमा का गुणगान दबे मुख होता ही रहता है, हां एक चाय ही ऐसी है जिसकी महिमा का गुणगान ना ही कभी खतम हुआ था और ना ही कभी खतम होगा. चाय ही एक ऐसा सूरा है जो हर ससुरा के जुबान पे चढता है ऊ भी बेझिझक का सही बोले ना, हमम...सही पकडे है पांडे जी. सब जम के मार रहा था अरेरे..... कौनो  लईका के नही जी चाय के चूसकि जी आप भी ना कुछू भी सोच लेते है,  हमहऊ मार लिये एक आध गो.. चूस्की चाय के. आज दुकनवा पे राहगिर कम नेता जी के चमचा जादे दिख रहा था, अऊर दिखे काहे नही आज तो मौका भी था अऊर दस्तूर भी. सब अपन अपन दाव पेल रहा था, हमहऊ कुछ मुह से बकारते पर इ...

देखें – एक ऐसा देश जहां सूरज कभी नहीं डूबता, फिर वहा मुसलमान कैसे रखते है रोज़ा; जानकर रह जायेंगे हैरान.

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• Raftaar News 30 May • 23:36 PM  • Anurag Shrivastwa  पवित्र माह-ए-रमजान चल रहा है! इसमें मुस्लिम धर्म के अनुयायी रोजे रखते हैं! यह जानना रोचक होगा कि ऐसे देश जहां सूरज कभी नहीं डूबता, वहां रोजे कैसे रखे जाते हैं? दरअसल आर्कटिक महाद्वीप में रहने वाले मुसलमानों के लिए रमजान के पवित्र दिनों में रोजे रखना सबसे बड़ी चुनौती है! वजह यह कि यहां सूरज का प्रकाश लगभग 24 घंटे दिखाई देता है! यानी यहां सूर्य अस्त नहीं होता है! उत्तरी फिनलैंड में जहां सूरज सिर्फ 55 मिनट के लिए अस्त होता है! वहीं, स्वीडन और आसपास के देशों में गर्मी के महीने में कोई सूर्यास्त अनुभव नहीं कर सकता है! द इंडिपेंडेंट की खबर के मुताबिक मोहम्मद ने बताया, ‘यहां रोजा सुबह 1:35 पर शुरू होता है और शाम को 12:48 पर खत्म हो जाता है! यानी यहां रहने वाला हर मुस्लिम 23 घंटे 13 मिनट का रोजा रखता है! ये वो देश है जहां 22 फीसद मुस्लिम आबादी है यानी 1.6 अरब लोगों इन देशों में रहते हैं! रमजान माह ब्रिटेन में रहने वाले लोगों को एक दिन में 16 और 19 घंटे का रोजा रखते हैं!

एक न्याय इसे भी चाहिए... दुनियावालो.

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अनुराग श्रीवास्तव 20 मई 11:36 am  निर्भया कांड मे दोषियों को सजा मिल गई तो हमें लगा कि चलो ज्योति सिंह पांडे उर्फ़ निर्भया को इंसाफ़ मिल गया. पर क्या सच मे इंसाफ़ मिल गया ये तो अब उसकी आत्मा ही जाने. छः मे से एक ने फाँसी लगा खुद को सजा दे दी एक को नाबालिग होने का फ़ायदा मिला. खैर चलो पाँच साल बाद ही सही इंसाफ़ तो मिल गया अब देखना है कि सजा पर अमल कब तक होता है, क्योंकि अब तक भारत मे कुल 1300 केस फाँसी के निलंबित है. फिर भी एक तरह से कहा जा सकता है कि इस केस का फैसला हो गया. पर एक और कोई है जिसे इंसाफ़ चाहिए, पिछले छः सालों से उसकी आत्मा भी न्याय के लिये भटक रहा है.  हम बात कर रहे है अपने शहर मुजफ्फरपुर बिहार कि उस मासूम सी बच्ची नवरुणा कि जिसे मालूम भी ना था कि 18 सितंबर 2012 कि वो काली रात उसकी ज़िन्दगी कि अंतिम काली रात बन जायेगी. किसी ने उसे सोते हुये ही उसके कमरे से उसे अगवा कर ले जाता है, साथ ही साथ उसके सारे सपने भी चुरा ले जाता है जो उसके आँखों मे पल रहे थे, सुबह होती है और शुरु होती है शहर मे एक नई कहानी, नवरूणा चक्रवर्ती कि रातों रात गायब होने कि कहानी. परिवार मे चित ...

आँखों मे जो भर दे पानी ऐसी है एक माँ के जज़्बे कि कहानी

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रफ़्तार न्यूज़ डेस्क 13 मई 2017 23:52 भले ही मेरे सपने टूटे हैं लेकिन हौसले अभी जिंदा है। जिंदगी ने मुझसे मेरा हमसफर छीन लिया लेकिन अब बच्चों को पढ़ा लिखाकर अफसर बनानो मेरा सपना है। इसके लिए मैं किसी के आगे हाथ नहीं फैलाऊंगी। कुली हूं लेकिन इज्जत का खाती हूं। बूढ़ी सास और तीन बच्चों की परवरिश का जिम्मा अब इसके कंधो पर आ गया था...। हम बात कर रहे हैं कटनी रेलवे स्टेशन में प्रतिदिन 270 किलोमीटर का सफर तय कर अपनी जिंदगी का बोझ हलका करने के लिए यात्रियों का बोझ ढो रही महिला कुली संध्या मरावी की। उसने रेलवे कुली का लाइसेंस अपने नाम कराते हुए बड़ी से बड़ी चुनौतियों का सामना करते हुए साहस और मेहनत के साथ जब वजन लेकर प्लेटफॉर्म में चलती है तो लोग हैरत में पड़ जाते हैं और जज्बे को सलाम करते हैं। 30 साल की उम्र में वह बच्चों की देखभाल के साथ चूल्हा-चक्की का काम संभाल रही थी, इसी बीच नियति ने धोखा दे दिया। हंसी-खुशी कट रही जिंदगी ने एकदम से करवट बदला और पति भोलाराम को बीमारी ने अपनी आगोश में ले लिया। इतना ही नहीं पति का देहांत हो गया। इससे घर की स्थिति लडख़ड़ा गई। बच्चों की परवरिश और दो वक्त की रोट...

नक्सलियों ने जवानों को क्यों मारा?

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पिछले दो सालो से लोगो कें बीच एक सवाल बड़ा ही खास रहा वो ये कि कट्टपा ने बाहुबली को क्यों मारा? तरह तरह कें पिक्चर तरह तरह कें मैसेज दो सालो तक सोशल मीडिया मे घूमता रहा और ये ही सवाल पूछता रहा कि कट्टपा ने बाहुबली को क्यों मारा?   और अब जबकि फ़िल्म रिलीज़ हो गई तो सब चल दिए अपनें इस सवाल का जवाब ढूँढने,  सवाल बहुत ही बड़ा और जरुरी था ना जवाब ढूंढना लाज़मी था .  पर एक सवाल ऐसा है जिसका जवाब ढूंढना सच मे बहुत ज़रूरी है , पर किसी को ज़रूरत ही महसूस नही होती कि इस सवाल का जवाब ढूंढा जाये. आप सोचते होंगे कि ऐसा कौन सा सवाल है जो 540 करोड कमाने वाला   बाहुबली से भी बड़ा हो गया तो जनाब वो सवाल है कि नक्सलियों ने हमारे जवानों को क्यों मारा?   क्यों बोलती बंद हो गई आप सब कि?  अबतक तो आपको बाहुबली का जवाब मिल ही गया होगा पर इस सवाल का जवाब कब मिलेगा?  कोई बतायेगा ..  हम बेपरवाह हो कर ज़िंदगी जिये जो इस बात की परवाह करते हुये अपनी जान गवा देते है, हम उन वीर जवानों कि परवाह क्यों नही करते है?  स्कूलों मे हम नागरिक शास्त्र कि पढ़ाई करते है इसमें हम अ...