• रोहित राज • 24 मई 08:42 am ✍पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह को उम्र कैद की सजा ✍ राजद नेता व पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह को कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है. 22 वर्ष पहले हुए हत्याकांड में उन्हें झारखंड के हजारीबाग कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनायी है. मंगलवार को हजारीबाग के एडीजे 9 के सुरेंद्र शर्मा की कोर्ट में हुई सुनवाई में प्रभुनाथ सिंह के साथ ही उनके भाई दीनानाथ सिंह व भतीजा रितेश को भी उम्रकैद की सजा सुनायी गयी है. इसके अलावा 40 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. इससे उनके परिवार के लोगों व समर्थकों में काफी मायूसी है. वहीं पीड़ित परिवार के लोग फैसले से संतुष्ट हैं, लेकिन उनका मानना है कि प्रभुनाथ सिंह को उम्रकैद की सजा मिलनी चाहिए. पत्नी चांदनी सिंह ने मीडिया को बताया कि प्रभुनाथ सिंह को फांसी की सजा मिलनी चाहिए थी. हालांकि उम्रकैद की सजा से थोड़ी राहत मिली है. एक विधवा को न्याय मिला है।. बता दें कि 22 साल पहले 3 जुलाई 1995 में मशरख के विधायक अशोक सिंह की हत्या उनके ही सरकारी आवास पर बम मार कर दी गयी थी. तब अशोक सिंह जनता दल के विधायक थे. विधायक अशोक सिंह की घटनास्थल पर...
न्यूज़ डेस्क : मिली जानकारी के अनुसार बिहार बोर्ड 25 मई तक इंटर का रिजल्ट जारी करने बाला था. पर यह नही हो सका, अब बताया जा है कि बिहार बोर्ड 30 मई को इंटर रिजल्ट जारी कर सकता है. हालाँकि मैट्रिक रिजल्ट 15 जून के तक घोषित होने की सम्भावना है. बता दें कि इस साल इंटर तथा मैट्रिक परीक्षा फरवरी माह में ही संपन्न हो गयी थी. पर परीक्षा के बाद मूल्यांकन कार्य शुरू होने के वक्त इंटर तथा मैट्रिक दोनों शिक्षकों ने समान काम के लिए समान वेतन सहित अन्य मांगों को लेकर मूल्यांकन का बहिष्कार कर दिया था. जिसके कारण रिजल्ट आने में देरी हो गई है.
रफ़्तार न्यूज़ डेस्क 13 मई 2017 23:52 भले ही मेरे सपने टूटे हैं लेकिन हौसले अभी जिंदा है। जिंदगी ने मुझसे मेरा हमसफर छीन लिया लेकिन अब बच्चों को पढ़ा लिखाकर अफसर बनानो मेरा सपना है। इसके लिए मैं किसी के आगे हाथ नहीं फैलाऊंगी। कुली हूं लेकिन इज्जत का खाती हूं। बूढ़ी सास और तीन बच्चों की परवरिश का जिम्मा अब इसके कंधो पर आ गया था...। हम बात कर रहे हैं कटनी रेलवे स्टेशन में प्रतिदिन 270 किलोमीटर का सफर तय कर अपनी जिंदगी का बोझ हलका करने के लिए यात्रियों का बोझ ढो रही महिला कुली संध्या मरावी की। उसने रेलवे कुली का लाइसेंस अपने नाम कराते हुए बड़ी से बड़ी चुनौतियों का सामना करते हुए साहस और मेहनत के साथ जब वजन लेकर प्लेटफॉर्म में चलती है तो लोग हैरत में पड़ जाते हैं और जज्बे को सलाम करते हैं। 30 साल की उम्र में वह बच्चों की देखभाल के साथ चूल्हा-चक्की का काम संभाल रही थी, इसी बीच नियति ने धोखा दे दिया। हंसी-खुशी कट रही जिंदगी ने एकदम से करवट बदला और पति भोलाराम को बीमारी ने अपनी आगोश में ले लिया। इतना ही नहीं पति का देहांत हो गया। इससे घर की स्थिति लडख़ड़ा गई। बच्चों की परवरिश और दो वक्त की रोट...
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